
1994
पंचांग कैलेंडर का द्वार
आज की तीन पहेलियाँ
एक पत्ता पलटिए। तीनों का सही उत्तर दीजिए और यह द्वार आपके आकाश में मुद्रित हो जाएगा। हर सुबह नई पहेलियाँ।
एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा और अमावस्या यहाँ सूचीबद्ध नहीं हैं। ये हर पक्ष लौटते हैं, और इन्हें गिनाने से वे दिन दब जाते जो नहीं लौटते। किसी भी मास को खोलिए, वहाँ ये पूरे मिलेंगे।
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
आकाश पढ़ा जा रहा है…
वेदौम् 1900 से 2100 तक के वर्ष बनाता है।
इसलिए नहीं कि उसके परे आकाश अज्ञात है — स्विस एफ़ेमेरिस उससे कहीं आगे तक जाती है — बल्कि इसलिए कि पिछली शताब्दी से पहले के समय-क्षेत्र अनुमान भर हैं, और पर्वों की परिपाटी भी शताब्दियों में बदली है। इस अवधि के भीतर वेदौम् जो बनाता है, उस पर टिक सकता है।