Lamps lit in a row at dusk.

मुहूर्त

संस्कार: अक्टूबर 2026

दिल्ली के लिए शुभ दिन और समय, वास्तविक आकाश से सबके लिए गणना किए गए। आपके परिवार की अपनी कुण्डलियाँ इन्हें और सूक्ष्म करती हैं।

4 शुभ दिन

  • 19 अक्टूबर 2026

    उत्तराषाढ़ा · सोमवार

    उत्तराषाढ़ा ध्रुव नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग उसे देती है जो टिकने के लिए हो।

    सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 04:48 – 05:36ब्रह्म मुहूर्तकन्या लग्न
    • 09:15 – 10:40शुभवृश्चिक लग्न
    • 14:56 – 16:13लाभकुंभ लग्न
    • 16:13 – 17:38अमृत · लाभमीन लग्न
    • 19:22 – 21:09अमृत · लाभवृषभ लग्न
    • 21:09 – 22:31अमृतमिथुन लग्न
  • 21 अक्टूबर 2026

    धनिष्ठा · बुधवार

    धनिष्ठा चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।

    बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 04:49 – 05:37ब्रह्म मुहूर्तकन्या लग्न
    • 16:20 – 17:30लाभमीन लग्न
    • 21:01 – 23:16अमृत · लाभमिथुन लग्न
    • 01:41 – 03:16शुभसिंह लग्न22 अक्टूबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
  • 26 अक्टूबर 2026

    अश्विनी · सोमवार

    अश्विनी क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।

    सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 04:52 – 05:40ब्रह्म मुहूर्तकन्या लग्न
    • 09:16 – 10:32शुभवृश्चिक लग्न
    • 14:53 – 15:46लाभकुंभ लग्न
    • 15:46 – 17:11अमृत · लाभमीन लग्न
    • 19:17 – 20:41लाभवृषभ लग्न
    • 20:41 – 22:29अमृत · लाभमिथुन लग्न
    • 01:16 – 01:41शुभसिंह लग्न27 अक्टूबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
  • 30 अक्टूबर 2026

    मृगशिरा · शुक्रवार

    मृगशिरा मृदु नक्षत्र है — शिशु अथवा अतिथि के साथ जो किया जाए, उसके लिए पर्याप्त कोमल।

    शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 04:55 – 05:38ब्रह्म मुहूर्तकन्या लग्न
    • 09:18 – 10:16अमृतवृश्चिक लग्न
    • 10:16 – 10:41अमृतधनु लग्न
    • 01:01 – 01:41अमृतसिंह लग्न31 अक्टूबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
    • 03:18 – 04:55शुभकन्या लग्न31 अक्टूबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है

यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।

हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।

सहायता