
मुहूर्त
निष्क्रमण — शिशु का प्रथम बाहर-गमन: नवंबर 2026
5 शुभ दिन
6 नवंबर 2026
हस्त · शुक्रवार
हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 09:20 – 09:49अमृतवृश्चिक लग्न
- 09:49 – 10:42अमृतधनु लग्न
- 00:33 – 01:43अमृतसिंह लग्न7 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
- 03:21 – 04:59शुभकन्या लग्न7 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
9 नवंबर 2026
स्वाति · सोमवार
स्वाति चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 07:18 – 08:00अमृतवृश्चिक लग्न
- 09:37 – 10:43शुभधनु लग्न
- 14:50 – 16:15अमृत · लाभमीन लग्न
- 19:09 – 19:46लाभवृषभ लग्न
- 19:46 – 22:01अमृत · लाभमिथुन लग्न
- 00:21 – 01:43शुभसिंह लग्न10 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
11 नवंबर 2026
अनुराधा · बुधवार
अनुराधा मृदु नक्षत्र है — शिशु अथवा अतिथि के साथ जो किया जाए, उसके लिए पर्याप्त कोमल।
बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 07:10 – 08:01लाभवृश्चिक लग्न
- 20:47 – 21:53लाभमिथुन लग्न
- 01:44 – 02:31शुभसिंह लग्न12 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
- 02:31 – 03:23शुभकन्या लग्न12 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
16 नवंबर 2026
श्रवण · सोमवार
श्रवण चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 06:51 – 08:04अमृतवृश्चिक लग्न
- 09:25 – 10:45शुभधनु लग्न
- 14:46 – 15:48लाभमीन लग्न
- 19:19 – 21:34अमृत · लाभमिथुन लग्न
- 00:06 – 01:45शुभसिंह लग्न17 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
26 नवंबर 2026
मृगशिरा · गुरुवार
मृगशिरा मृदु नक्षत्र है — शिशु अथवा अतिथि के साथ जो किया जाए, उसके लिए पर्याप्त कोमल।
गुरुवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 12:16 – 13:27लाभ · अभिजित् मुहूर्तकुंभ लग्न
- 16:44 – 18:40अमृत · शुभवृषभ लग्न
- 18:40 – 19:05अमृतमिथुन लग्न
- 06:07 – 06:53अमृतवृश्चिक लग्न27 नवंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।
हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।