Lamps lit in a row at dusk.

मुहूर्त

पूजा — अर्चना: दिसंबर 2026

दिल्ली के लिए शुभ दिन और समय, वास्तविक आकाश से सबके लिए गणना किए गए। आपके परिवार की अपनी कुण्डलियाँ इन्हें और सूक्ष्म करती हैं।

4 शुभ दिन

  • 3 दिसंबर 2026

    उत्तरा फाल्गुनी · गुरुवार

    उत्तरा फाल्गुनी ध्रुव नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग उसे देती है जो टिकने के लिए हो।

    गुरुवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 18:12 – 19:05अमृतमिथुन लग्न
    • 20:47 – 22:29शुभकर्क लग्न
    • 03:34 – 05:40अमृत · लाभतुला लग्न4 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
  • 4 दिसंबर 2026

    हस्त · शुक्रवार

    हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।

    शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 09:34 – 10:02अमृतधनु लग्न
    • 10:02 – 10:53अमृतमकर लग्न
    • 01:00 – 01:53अमृतकन्या लग्न5 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
    • 03:35 – 05:17शुभतुला लग्न5 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
  • 30 दिसंबर 2026

    उत्तरा फाल्गुनी · बुधवार

    उत्तरा फाल्गुनी ध्रुव नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग उसे देती है जो टिकने के लिए हो।

    बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 07:13 – 08:20लाभधनु लग्न
    • 16:26 – 17:33लाभमिथुन लग्न
    • 23:18 – 00:23अमृतकन्या लग्न
    • 02:06 – 03:48शुभतुला लग्न31 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
  • 31 दिसंबर 2026

    हस्त · गुरुवार

    हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।

    गुरुवार · रिक्ता तिथि नहीं

    इस दिन की वेलाएँ

    • 12:03 – 12:51लाभ · अभिजित् मुहूर्तमीन लग्न
    • 12:51 – 13:41लाभमेष लग्न
    • 16:22 – 18:37अमृत · शुभमिथुन लग्न
    • 18:37 – 19:16अमृतकर्क लग्न
    • 06:08 – 07:13अमृतधनु लग्न1 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है

यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।

हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।

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