
मुहूर्त
विवाह — पाणिग्रहण: दिसंबर 2026
पंचांग किसे रोके हुए है
सूर्य धनु अथवा मीन में है — खरमास। परम्परा इस अवधि में विवाह और गृह प्रवेश रोक रखती है। इस खोज के 15 दिन, और यह इस अवधि के भीतर नहीं खुलता।
4 शुभ दिन
3 दिसंबर 2026
उत्तरा फाल्गुनी · गुरुवार
उत्तरा फाल्गुनी ध्रुव नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग उसे देती है जो टिकने के लिए हो।
गुरुवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:44 – 06:09ब्रह्म मुहूर्तवृश्चिक लग्न
- 11:49 – 13:16लाभ · अभिजित् मुहूर्तकुंभ लग्न
- 16:17 – 18:12अमृत · शुभवृषभ लग्न
- 18:12 – 19:05अमृतमिथुन लग्न
- 05:40 – 06:58अमृतवृश्चिक लग्न4 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
4 दिसंबर 2026
हस्त · शुक्रवार
हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:40 – 06:10ब्रह्म मुहूर्तवृश्चिक लग्न
- 09:34 – 10:02अमृतधनु लग्न
- 12:11 – 13:12शुभ · अभिजित् मुहूर्तकुंभ लग्न
- 22:43 – 01:00अमृत · लाभसिंह लग्न
- 01:00 – 01:53अमृतकन्या लग्न5 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
14 दिसंबर 2026
श्रवण · सोमवार
श्रवण चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:29 – 06:17ब्रह्म मुहूर्तवृश्चिक लग्न
- 07:19 – 08:23अमृतधनु लग्न
- 15:33 – 17:25अमृत · लाभवृषभ लग्न
- 19:08 – 19:43लाभमिथुन लग्न
- 22:03 – 22:33अमृतसिंह लग्न
- 00:21 – 01:58शुभकन्या लग्न15 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
16 दिसंबर 2026
शतभिषा · बुधवार
शतभिषा चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:30 – 06:18ब्रह्म मुहूर्तवृश्चिक लग्न
- 07:11 – 08:24लाभधनु लग्न
- 16:09 – 17:21लाभवृषभ लग्न
- 21:56 – 00:13अमृत · लाभसिंह लग्न
- 01:59 – 02:30शुभकन्या लग्न17 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।
हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।