
मुहूर्त
विवाह — पाणिग्रहण: जनवरी 2027
पंचांग किसे रोके हुए है
सूर्य धनु अथवा मीन में है — खरमास। परम्परा इस अवधि में विवाह और गृह प्रवेश रोक रखती है। इस खोज के 14 दिन, और 15 जनवरी 2027 से आगे खुला है।
4 शुभ दिन
15 जनवरी 2027
रेवती · शुक्रवार
रेवती मृदु नक्षत्र है — शिशु अथवा अतिथि के साथ जो किया जाए, उसके लिए पर्याप्त कोमल।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:39 – 06:27ब्रह्म मुहूर्तधनु लग्न
- 09:52 – 10:27अमृतकुंभ लग्न
- 10:27 – 11:11अमृतमीन लग्न
- 22:49 – 00:31अमृत · लाभकन्या लग्न
- 03:52 – 05:09शुभवृश्चिक लग्न16 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
- 05:09 – 05:33शुभधनु लग्न16 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
20 जनवरी 2027
मृगशिरा · बुधवार
मृगशिरा मृदु नक्षत्र है — शिशु अथवा अतिथि के साथ जो किया जाए, उसके लिए पर्याप्त कोमल।
बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:38 – 06:26ब्रह्म मुहूर्तधनु लग्न
- 16:30 – 17:18लाभमिथुन लग्न
- 21:11 – 21:56लाभसिंह लग्न
- 21:56 – 00:12अमृत · लाभकन्या लग्न
- 02:31 – 03:52शुभवृश्चिक लग्न21 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
27 जनवरी 2027
हस्त · बुधवार
हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।
बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:35 – 06:23ब्रह्म मुहूर्तधनु लग्न
- 21:28 – 23:44अमृत · लाभकन्या लग्न
- 02:13 – 03:52शुभवृश्चिक लग्न28 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
29 जनवरी 2027
स्वाति · शुक्रवार
स्वाति चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 05:35 – 06:23ब्रह्म मुहूर्तधनु लग्न
- 09:52 – 10:57अमृतमीन लग्न
- 12:34 – 13:55शुभ · अभिजित् मुहूर्तवृषभ लग्न
- 22:54 – 23:36लाभकन्या लग्न
- 04:14 – 05:31शुभधनु लग्न30 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।
हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।