
मुहूर्त
यात्रा — प्रस्थान: दिसंबर 2026
5 शुभ दिन
4 दिसंबर 2026
हस्त · शुक्रवार
हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 09:34 – 10:02अमृतधनु लग्न
- 10:02 – 10:53अमृतमकर लग्न
- 01:00 – 01:53अमृतकन्या लग्न5 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
- 03:35 – 05:17शुभतुला लग्न5 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
14 दिसंबर 2026
श्रवण · सोमवार
श्रवण चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
सोमवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 07:19 – 08:23अमृतधनु लग्न
- 09:40 – 10:58शुभमकर लग्न
- 14:50 – 15:33लाभमेष लग्न
- 19:08 – 19:43लाभमिथुन लग्न
- 19:43 – 22:03अमृत · लाभकर्क लग्न
- 00:21 – 01:58शुभकन्या लग्न15 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
16 दिसंबर 2026
शतभिषा · बुधवार
शतभिषा चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
बुधवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 07:11 – 08:24लाभधनु लग्न
- 20:51 – 21:56लाभकर्क लग्न
- 01:59 – 02:30शुभकन्या लग्न17 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
- 02:30 – 03:42शुभतुला लग्न17 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
25 दिसंबर 2026
पुनर्वसु · शुक्रवार
पुनर्वसु चर नक्षत्र है — परम्परा यह वर्ग प्रस्थान को देती है।
शुक्रवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 09:46 – 10:22अमृतमकर लग्न
- 12:21 – 13:15शुभ · अभिजित् मुहूर्तमीन लग्न
- 23:38 – 01:54अमृत · लाभकन्या लग्न
- 03:46 – 04:14शुभतुला लग्न26 दिसंबर 2026 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
31 दिसंबर 2026
हस्त · गुरुवार
हस्त क्षिप्र नक्षत्र है — हल्का, शीघ्र, आरम्भ के लिए बना।
गुरुवार · रिक्ता तिथि नहीं
इस दिन की वेलाएँ
- 12:03 – 12:51लाभ · अभिजित् मुहूर्तमीन लग्न
- 12:51 – 13:41लाभमेष लग्न
- 16:22 – 18:37अमृत · शुभमिथुन लग्न
- 18:37 – 19:16अमृतकर्क लग्न
- 06:08 – 07:13अमृतधनु लग्न1 जनवरी 2027 को, इसी दिन की रात — वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है
यह सामान्य पाठ है — आपके स्थान के लिए पंचांग का उत्तर। अपनी कुण्डली बनाइए और यह आपका हो जाएगा: चन्द्रमा आपके अपने जन्म-नक्षत्र और जन्म-राशि से कितनी दूर है, यह उसका आधा है जो पुरोहित तौलते हैं।
हर वेला कोई शुभ चौघड़िया अथवा मुहूर्त है, जिसमें से राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काट दिए गए हैं, और केवल वहीं रखी गई है जहाँ उदित राशि आपके आरम्भ के अनुकूल हो। 24 मिनट से छोटी कोई वेला नहीं दी जाती, क्योंकि मुहूर्त शास्त्रतः अड़तालीस मिनट का होता है।